26 January Speech in Hindi

आदरणीय——-

आज इस गणतंत्र दिन के पावन पर्व पर हम अगर आज़ादी की हवाओं में साँस लेते हुए यहाँ एकत्र हुए है और अपने अपने विचार व्यक्त कर सकते है, तो इसका श्रेय जाता है हमारे उन सारे नागरिक भाइयों और बहनों को जिसने देश को अंग्रेजों की गुलामी से मुक्त करने हेतु कड़ा संघर्ष किया। आज हमारी इस मातृभूमि का ६७वां गणतंत्र दिन है। आज ही के दिन १९५० मे हमारे देश को गणतंत्र घोषित कर उसे लागू किया गया था।

वो दौर हमारे इस देश के लिये काफ़ी मुश्किल दौर था जब व्यापार की मंशा ले के आयें विदेशियों ने हमारी ज़मीन पर धीरे धीरे कब्ज़ा करके तकरीबन १५० साल तक हमे ग़ुलाम बनाये रक्खा। १८५७ से देश के लोगो मे कुछ जागरूकता आना शुरु हुआ और धीरे धीरे विदेशियों के खिलाफ़ आवाज़ उठना शुरु हुआ। आखिर मे काफ़ी सारे आंदोलन और रेलियाँ के बाद १९४७ मे १५ अगस्त को इस देश को आज़ाद घोषित किया गया। अंग्रेज तो चले गये परंतु अब तक देश की व्यवस्था भारत सरकार अधिनियम १९३५ के अनुसार चलती थी जो कि अब बदलना ज़रुरी था और इसीलिए नेताओने एकत्रित हो कर संविधान समिति का गठन करने का निश्चय किया और सुविख्यात कानून निष्णाँत डो. बाबासाहब आंबेडकर की अध्यक्षता मे तजज्ञ सभ्यो ने मिलकर कई संविधान का अभ्यास करके देश के संविधान का आखिरी प्ररुप दिसंबर १९४९ मे सदन को सौंपा। और सदन मे उसे २४ जनवरी के दिन १९५० मे उसे पारित किया गया। १९३० मे कांग्रेस ने २६ जनवरी के दिन पूर्ण स्वराज की मांग बुलंद की थी और इसी घटना एवं दिन को यादगार बनाने के लिये ये तय किया गया की २६ जनवरी से देश मे संविधान लागू किया जाये और उसे गणतंत्र भी घोषित किया जाये।

२६ जनवरी के दिन सुबह देश के प्रथम राष्ट्रपति डो. राजेन्द्रप्रसाद ने पद और गोपनीयता की शपथ ली। देश के प्रथम प्रधानमंत्री ने इंडिया गेट पर अमर जवान ज्योति पर शहीदो को श्रध्धासुमन अर्पण किये और फ़िर राजपथ पर से ध्वजवंदन के बाद प्रवचन किया। संविधान ने भारत देश को गणतंत्र देश घोषित किया जिस के अनुसार देश मे नागरिक की अहम भूमिका होती है और वे ही चुनाव के जरीये आदेश देते है की सत्ता के सूत्र कौन सम्हालेगा एवं समय के साथ साथ कानून मे क्या क्या परिवर्तन करने होंगे। इस तरह देश मे लोग प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति एवं मुख्यमंत्री का चुनाव करते है। सत्ता के आखिरी सूत्र देश के राष्ट्रपति के हाथ मे रहते है और व्यवस्थापन की ज़िम्मेदारी प्रधानमंत्री की रहती है।

देश के जिम्मेदार नागरिक होने से ये हम सबका दायित्व बनता है की देश के विकास मे सहयोग करे और इसे संसार मे सर्व श्रेष्ठ देश बनाने के लिये संपूर्ण प्रयास करें।