२६ जनवरी 2018 – About 26 January in Hindi

२६ जनवरी- भारतीय इतिहास का स्वर्णाक्षर अंकित दिन

भारत देश के इतिहास मे २६ जनवरी के दिन का एक अनुठा महत्व है। १९४७ मे स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद देश की व्यवस्था कुछ चरमरा गयी थी और इस स्थिती में एक कानुन और व्यवस्था एवं देश चलाने के लिये एक कानुनी संविधान की बहुत ही जरुरत थी जो कि २६ जनवरी के दिन देश ने अपनाया था। भारत देश की आज़ादी के बाद ब्रिटीश कानुन का कोई खास महत्व नही था और वे इतने माइने भी नही रखते थे। इसीलिए संविधान समिति का गठन किया गया और प्रबुध्ध सभ्यो से बनी समिति ने काफ़ी संशोधन कर के भारत के संविधान की रचना की। उसका अंतिम स्वरुप इस समिति ने संसद को २४ जनवरी को सोंप दीया पर १९३० मे कोंग्रेस ने २६ जनवरी के दीन पुर्ण स्वराज की मांग बुलन्द की थी जिसकी वार्षिक जयंति के मद्दे नजर बंधारण को २६ जनवरी से लागु करने का तय कीया गया। यह संविधान का लागु होना और देश को गणतंत्र का दरजा देना देश के हित मे एक अनुठा कदम था जिसकी असर आने वाले कई सालो तक इस देश के गौरव को एक नया आयाम देने वाली थी।

एतिहासिक दिन:

२६ जनवरी १९५० के दिन संविधान को लागु करने के लिये २४ जनवरी को ही विधेयक पारीत कर दिया था। इस दीन भारत के प्रथम राष्ट्रपति डो. राजेन्द्रप्रसाद ने राष्ट्रपति पद की शपथ संसद के दरबार सभाखंड मे ली और वहां से सीधे इरवीन स्टेडियम पहुंच गये। देश के प्रथम प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरु, इंडीया गेट पर अमर जवान ज्योति पे शहीदो को श्रध्धा सुमन अर्पण करने पहुंचे थे। इस दिन से ये एक शिरस्ता बना हुआ है कि प्रधानमंत्री अमर जवान ज्योति जाते है और वहां से सीधे राजपथ ध्वज वंदन समारोह मे पहुंचते है। यहां राष्ट्रपति ने तीनो सेना की सलामी ली थी और बहुत सारे सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किये गये थे।

गणतंत्र दिन पर आयोजित प्रवृत्तियां:

इस पावन पर्व को मनाने के लिये सरकार और लोगो की ओर से बहुत सारी प्रवृत्तियां की जाती है। देश की राजधानी को सजाया जाता है और इस गणतंत्र के पर्व को मनाने के लिये काफ़ी व्यवस्थाए की जाती है। देश के प्रधानमंत्री सेना के बहादुर जवानो की जिन्होने अपने प्राण देश के लिये त्याग दीये उन्हे याद करने और श्रध्धा सुमन अर्पण करने अमर जवान ज्योति जाते है। इस दिन देश की तीनो सेना परेड के दौरान अपना शक्ति प्रदर्शन करती है। देश के अत्याधुनिक हथियार भी परेड मे शामिल हो के दुनिया को अपना कडा संदेश देते है। राष्ट्रपती ध्वज वंदन के बाद सेना की सलामी लेते है जीसके बाद प्रधानमंत्री प्रवचन देते है।

समाज मे हर्षोल्लास का माहौल:

इस दिन देश के हर कोने मे जश्न का माहौल और देश भक्ति का सुरुर छाया रहता है। वैसे शैक्षणिक संस्थानो मे और सरकारी दफ़्तरो मे छुट्टी घोषित होती है पर काफ़ी जगहो पर वक्त्तृत्व और क्विज जैसी प्रतियोगिताए आयोजित की जाती है। काफ़ी लोग इस दिन समाज सेवा के कार्य भी करते है। देश के हर राज्य की राजधानी मे ध्वज वंदन कीया जाता है और काफ़ी सारे कार्यक्रम भी आयोजित किये जाते है। इस दिन दोपहर के बाद मानो सब जग छुट्टी ही मनाइ जाती है। आपातकालीन सेवाओ के अलावा सारी जगह छुट्टी का माहौल और देश भक्ति का समा पुरे दिन बना रहता है।